प्रतियोगिता में भाग लेने की सामान्य योग्यता जांचने की प्रक्रिया अर्हता परीक्षा है। यह सुनिश्चित करती है कि आवेदक प्रतिभागी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए उपयुक्त है या नहीं। यदि योग्य पाया जाता है, तो उसे प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति मिलती है।
महत्वपूर्ण अंतर यह है कि प्रतियोगिता में पुरस्कार और प्रमाणपत्र दिए जाते हैं, जबकि अर्हता परीक्षा में ऐसा कुछ नहीं होता। यह केवल प्रतिभागी की योग्यता को जांचने का माध्यम है। प्रतियोगिता और अर्हता परीक्षा अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं।
कंठस्थपाठ प्रतियोगिता के प्रतिभागियों के लिए एक वर्ष में दो बार अर्हता परीक्षा आयोजित होती है। शेष के लिए केवल एक बार।
संस्कृत प्रतिभा खोज प्रतियोगिता की अर्हता परीक्षा की तिथि, समय और अन्य नवीनतम जानकारी आधिकारिक वेब पोर्टल के “नोटिस बोर्ड” अनुभाग में प्रकाशित की जाती है।
https://upsanskritpratibhakhoj.com/Latest_News.aspx
छात्रों को समय-समय पर इस पृष्ठ को अवश्य देखना चाहिए।
हाँ, कोई आवेदक एक वर्ष में दो बार अर्हता परीक्षा में भाग ले सकता है, यदि उसने कंठस्थपाठ जैसी प्रतियोगिताओं के लिए आवेदन किया हो।
यदि किसी आवेदक को प्रथम बार में 50% अंक प्राप्त नहीं हुए हों अथवा वह प्रतियोगिता में चयन सुनिश्चित करने हेतु अधिक अंक प्राप्त करना चाहता हो, तो वह पुनः परीक्षा दे सकता है।
अर्हता परीक्षा में लगभग 10 से 20 प्रश्न पूछे जाते हैं। यह परीक्षा मौखिक रूप में आयोजित की जाती है। पिछले वर्ष का नमूना वीडियो भी उपलब्ध है, जिससे अभ्यर्थी परीक्षा की प्रकृति को समझ सकते हैं।
अर्हता परीक्षा का माध्यम ऑनलाइन (मौखिक) होता है। अभ्यर्थी को निर्धारित समय पर मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से मौखिक रूप में उत्तर देने होते हैं।
नहीं, मंडल से आरंभ होने वाली संस्कृत सामान्य ज्ञान (युवा वर्ग) तथा श्लोकान्त्याक्षरी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए पहले अर्हता परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होता है।
हाँ, प्रत्येक प्रतिभागी को प्रतियोगिता में सम्मिलित होने के लिए हर वर्ष पुनः अर्हता परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक होता है, भले ही उसने पूर्व वर्ष में वही परीक्षा पास की हो।
नोट: अर्हता परीक्षा की तिथि, माध्यम एवं नियम संबंधित वर्ष की अधिसूचना के अनुसार परिवर्तित हो सकते हैं।
कृपया पोर्टल पर प्रकाशित नवीनतम सूचना अवश्य देखें।